प्रिय पाठकों, उपन्यास का शीर्षक ‘‘कब्जा’’ आपके लिये कौतूहल का विषय हो सकता है क्योंकि सामान्य रूप से इस शब्द को एक अधिकृत/अनाधिकृत चेष्टा के परिणाम के तौर पर प्राप्त किसी भौतिक वस्तु के ऊपर अपना अधिकार जताने के सन्दर्भ में लिया जाता है। यहां यह शब्द एक किशोरवय की कन्या के हृदयतल में, एक सीधे-सादे लड़के हेतु, बचपन से पल रही स्नेह की भावना के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच जाने को परिभाषित करता है। उसने बिना किसी तर्क, बिना किसी किन्तु-परन्तु की भावना के साथ मान लिया कि उस लड़के पर उसका पूर्ण अधिकार है और इस अधिकार को कोई चुनौती नहीं दे सकता, न ये समाज, न इस समाज के द्वारा बनायी गयी जाति व्यवस्था और तो और वो लड़का स्वयं भी नहीं। ऐसी भावना किसी के प्रति प्यार की पराकाष्ठा का परिणाम होती है। मैं सभी कहानियां घटित घटनाओं के आधार पर ही लिखता हूँ। यह उपन्यास भी एक घटित घटना का शाब्दिक रूपांतरण ही है। इस उपन्यास को लिखकर मैने ‘‘उस’’ कब्जा करने वाली कन्या के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का प्रयास किया है। भगवान से इस युगल की सदैव कुशलता की कामना करता हूँ। मेरा पूर्ण विश्वास है कि यह उपन्यास आपको बेहद पसन्द आयेगा। एक लेखक की ओर से अपने पाठकों को उनके पैसों के बदले पूर्ण उपभोक्ता संतुष्टि का वादा है।
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Yes — the novel deals with human emotions and social settings that will appeal to readers of contemporary Hindi fiction.